बलूचिस्तान में हो रहे विरोध प्रदर्शन, पाकिस्तान की कार्रवाई पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति ने लिया संज्ञान
Balochistan : बलूचिस्तान के बाद अब पाकिस्तान और जन मनीर की फौज के खिलाफ बगावत की लहर पीओके यानी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भी जोर पकड़ लिया है. लगातार तीन दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शन से बौखलाए पाकिस्तानी बलों की फायरिंग में कम से कम 14 आम नागरिक मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हो गए हैं. उधर, पाकिस्तानी रेंजर्स की गोलीबारी में भी तीन पुलिसकर्मी भी मारे गए हैं. इस फायरिंग में नौ घायल भी हुए हैं. पीओके के प्रदर्शनकारियों पर इस बर्बर कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार समिति ने भी संज्ञान लिया है.
समिति के प्रवक्ता नासिर अजिज खान ने संयुक्त राष्ट्र और विश्व समुदाय से आग्रह किया है कि पीओके में दमन के खिलाफ कार्रवाई करे, वहां की स्थिति गंभीर होती जा रही है. यह विरोध प्रदर्शन मुजफ्फराबाद, मीरपुर और कोटली समेत कई जिलों में फैल चुका है. स्थिति पर नियंत्रण के लिए अतिरिक्त पुलिस और रेंजर्स तैनात किए हैं. साथ ही साथ वहां इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं भी निलंबित कर दी गई हैं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पीओके में 72 घंटों से यहां बाजार से लेकर दुकानें, ट्रांसपोर्ट और सरकारी दफ्तर सब कुछ पूरी तरह से बंद पड़े हैं.
लोगों का गुस्सा सीधे पाकिस्तानी सेना की ज्यादतियों पर फूट पड़ा है. ऐसे कई तस्वीरें और वीडियोज सामने आए हैं, जिनमें प्रदर्शनकारी गाड़ियों में तोड़फोड़ करते नजर आ रहे हैं. तीन दिनों से जारी इस जोरदार विरोध प्रदर्शन में अब प्रदर्शनकारी पाकिस्तान और मुनीर की सेना को चुड़ैल करार दे रहे हैं. उनका कहना है कि सेना और सरकार लोगों की हत्या कर रही है. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भ्रष्टाचार चरम पर है. पीओके की जनता को उनके राजनीतिक अधिकार भी नहीं दिए जा रहे हैं.
विरोध प्रदर्शन की अगवाई कर रही आवामी ऐक्शन कमेटी के नेता शौकत नवाज मीर ने कहा कि हमारा संघर्ष किसी एक व्यक्ति से नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम से है. यह जनता का संघर्ष है, यह आपका संघर्ष है और यह हम सभी का संघर्ष है. हम सभी मिलकर इस सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाएंगे. उन्होंने पाकिस्तानी सेना और सरकार को लेकर कहा, एक चुड़ैल लोगों को मारने पर तुली हुई है. मीर ने कहा कि यह संघर्ष आखिरी सांस तक जारी रहेगा. हम चुप नहीं रहेंगे.
सरकार दो साल पहले हुए समझौते को पूरी तरह से लागू कर रही
पीओके के लोग अब दबाव के आगे और नहीं झुकेंगे. पीछे मुड़कर देखा जाए तो यह विरोध प्रदर्शन दो साल पहले क्षेत्र में आटे और बिजली की नियमित और रियायती आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए शुरू हुआ था, लेकिन अब इसमें अतिरिक्त मांगें भी जुड़ गई हैं, जैसे कश्मीरी अभिजात वर्ग के विशेषाधिकारों में कटौती, आरक्षित विधानसभा सीटों का उन्मूलन और मुफ्त शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएं.
जेकेजेएएसी का आरोप है कि इस बार के पीछे सबसे बड़ा कारण है. सरकार दो साल पहले हुए समझौते को पूरी तरह से लागू कर रही है. प्रदर्शनकारियों ने 38 सूत्री मांगपत्र प्रस्तुत किया, जिसमें प्रमुख मांगें शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों की समाप्ति और अभिजात वर्ग के विशेषाधिकारों की वापसी शामिल हैं. इस बीच, खबर है कि लोगों ने 164 पंजाब पुलिस के अधिकारियों को बंधक बना लिया है.
सुरक्षाबल प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए तरह-तरह के हथकंडे आजमा रहे हैं. प्रदर्शनकारियों को रोकने में जुटी सुरक्षाबल. पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने कई पुलों और मुख्य सड़कों पर भारी कंटेनर खड़े कर दिए, लेकिन भीड़ ने उनका मुकाबला करते हुए इन कंटेनरों को नदी में फेंक दिया। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने रास्ता साफ करने के लिए बुलडोजर भी इस्तेमाल किए.
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