FDI बढ़ाने के लिए नीति आयोग आया आगे, टैक्स सिस्टम सरल करने का दिया सुझाव
नई दिल्ली: भारत के नीति आयोग ने देश में विदेशी निवेशकों का भरोसा जीतने और देश में एफडीआई को प्रोत्साहित करने के लिए टैक्स सिस्टम को सरल बनाने की दिशा में नयी पहल की है। हाल में शेयर मार्केट से विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर पैसे निकालने और एफडीआई घटने की रिपोर्टों के बाद नीति आयोग ने ये पहल की है। नीति आयोग ने सरकार को सुझाव दिया है कि विदेशी कंपनियों के लिए अनुमानित कराधान योजना लाई जाए। इससे विवादों में कमी आएगी और निवेशकों को देश में निवेश के लिए स्पष्ट व स्थिर माहौल मिलेगा।
नीति आयोग ने विदेशी निवेशकों को लक्ष्य कर जारी एक पॉलिसी वर्किंग पेपर में कहा है कि यह वैकल्पिक योजना विदेशी कंपनियों को टैक्स विवादों से राहत देगी। इसमें स्थायी प्रतिष्ठान से जुड़े मामलों को आसान बनाया जाएगा और अनुपालन प्रक्रिया सरल होगी। विदेशी कंपनियों को भारत में कर विवादों से बचाने और अनुपालन आसान बनाने के लिए नीति आयोग ने वैकल्पिक अनुमानित कर विकल्प पेश किया जो सकल राजस्व पर आधारित है। यह योजना न केवल निवेशकों को भरोसा दिलाएगी बल्कि सरकार के राजस्व की सुरक्षा भी करेगी। पॉलिसी वर्किंग पेपर का उद्देश्य भारत के निवेश माहौल को मजबूत बनाने के लिए पूर्वानुमान और विवाद समाधान पर विदेशी निवेशकों की चिंताओं को दूर करना है। यह सिफारिश थिंक टैंक की नवीनतम टैक्स पॉलिसी वर्किंग पेपर सीरीज – 1 में सामने आई है।
नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने पिछले दो दशकों में एफडीआई और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) में भारत की सस्टेनेबल ग्रोथ पर प्रकाश डाला, जो मजबूत इकोनॉमिक फंडामेंटल को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि स्थायी प्रतिष्ठानों के प्रति दृष्टिकोण में सुधार से कर नियमों में अधिक स्पष्टता और पूर्वानुमानशीलता आएगी, जिससे नए विदेशी निवेश आकर्षित होंगे और मौजूदा बहुराष्ट्रीय निगमों के विस्तार को प्रोत्साहन मिलेगा।
आयोग ने कहा कि यह समाधान भारत के कराधान अधिकार और निवेशकों की सुविधा दोनों के बीच संतुलन बनाएगा। निवेश में अड़चन और सुधार कार्यपत्र में बताया गया है कि भारत में विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है। लेकिन अस्पष्ट नियम और विवाद निवेशकों को असहज करते हैं। विशेषकर पीई रेगुलेशन की अस्पष्टता के कारण कई बार निवेशक असमंजस में रहते हैं। आयोग का मानना है कि अगर अनुमानित कराधान व्यवस्था लागू हो जाती है तो भारत की टैक्स व्यवस्था एक 'माइनफील्ड' से बदलकर 'रोशनी से भरे रास्ते' में बदल जाएगी, जिससे भारत की ग्लोबल बिजनेस इंडेक्स रैंकिंग में सुधार होगा। नीति आयोग के अनुसार देश 2047 तक विकसित भारत बनने के विजन की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है, ऐसे में ट्रांसपैरेंट, पूर्वानुमानित और एफिशिएंट टैक्स फ्रेमवर्क बनाना लॉन्ग टर्म ग्रोथ के लिए बेहद आवश्यक है।
नीति आयोग के टैक्स पॉलिसी पर कंसल्टेटिव ग्रुप (सीजीटीपी) का ध्यान ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने, एफडीआई को प्रमोट करने, टैक्स के नियमों को आसान बनाने और एक फ्यूचर-रेडी सिस्टम को बनाने पर है। नीति आयोग द्वारा जारी वर्किंग पेपर केन्द्र व राज्य सरकार की भावना के अनुरूप सभी हितधारकों के साथ चर्चा के बाद तैयार किया गया है। पेपर को अंतिम रूप देने से पहले टिप्पणियों और सुझावों के लिए उसका ड्राफ्ट भी संबधित पक्षों के साथ साझा किया गया था। इस लॉन्च में सीबीडीटी, डीपीआईआईटी, आईसीएआई और सीबीसी के प्रतिनिधियों के साथ-साथ लक्ष्मीकुमारन एंड श्रीधरन, डेलॉइट, ईवाई और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिन्होंने कर नीति सुधारों को आगे बढ़ाने और अधिक पूर्वानुमानित निवेश वातावरण को बढ़ावा देने में सार्वजनिक-निजी सहयोग की भावना को रेखांकित किया।
वर्किंग पेपर में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि एफडीआई और एफपीआई को भारत के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण उत्प्रेरक के रूप में मान्यता प्राप्त है। विदेशी निवेशकों में विश्वास पैदा करने के लिए एक स्थिर कर व्यवस्था महत्वपूर्ण है। हालांकि, विदेशी निवेशकों को अक्सर महत्वपूर्ण कर अनिश्चितता और अनुपालन बोझ का सामना करना पड़ता है। नीति आयोग के अनुसार, इन कर संबंधी बाधाओं के बावजूद, भारत ने पिछले दो दशकों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की है, जो एक निवेश गंतव्य के रूप में इसके आकर्षण को दर्शाता है। यह वृद्धि दर्शाती है कि भारत की मजबूत फंडामेंटल इकोनॉमिक शक्तियां, जिसमें देश का विशाल बाजार, जनसांख्यिकीय लाभांश और वर्तमान आर्थिक सुधार शामिल है, निवेश आकर्षित करने के महत्वपूर्ण कारक हैं। नीति आयोग का दावा है कि वर्किंग पेपर विदेशी निवेशकों के लिए कर निश्चितता और पूर्वानुमानशीलता को बढ़ाने के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क का प्रस्ताव करता है।