जेल में बंद पिता की बेटी को वकील बनता देखने का सपना हुआ पूरा, केरल हाईकोर्ट ने दी 5 दिन की छुट्टी
न्यूज़11 भारत रांची/डेस्क: आमतौर पर जेल में बंद दोषियों को निजी आयोजनों के लिए छुट्टी मिलना मुश्किल होता है, लेकिन केरल हाईकोर्ट ने एक मानवता भरा कदम उठाते हुए इस नियम में बदलाव किया. जस्टिस पीवी कुन्हीकृष्णन ने सजा काट रहे एक दोषी को 5 दिन की आपातकालीन छुट्टी दी, ताकि वह अपनी बेटी के वकील बनने के कार्यक्रम में मौजूद हो सके.
यह मामला तब सामने आया जब दोषी की बेटी ने एलएलबी की पढ़ाई पूरी की और वकील के रूप में रजिस्ट्रेशन करवाने जा रही थी. पिता की मौजूदगी उसके लिए भावनात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण थी. कोर्ट ने कहा, "भले ही याचिकाकर्ता दोषी है, लेकिन हर बच्चे की नजर में पिता हीरो होता हैं. बेटी की भावनाओं से अदालत मुंह नहीं मोड़ सकती."
लोक अभियोजक ने याचिका का विरोध किया और कहा कि आपातकालीन छुट्टियां सभी निजी आयोजनों के लिए नहीं दी जा सकती लेकिन जस्टिस कुन्हीकृष्णन ने कहा कि यह मामला विशेष है और मानवीय दृष्टिकोण से देखने की जरूरत हैं. दोषी तवानुर केंद्रीय कारागार और सुधार गृह में बंद था और उसने 10 से 14 अक्टूबर तक आपातकालीन छुट्टी की मांग की थी. पहले जेल अधिकारियों ने इसे अस्वीकार कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे मंजूरी दे दी. कोर्ट ने आदेश दिया कि दोषी को अस्थाई रूप से रिहा किया जाए, ताकि वह बेटी के नामांकन समारोह में मौजूद हो सके.
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